₹840 करोड़ की लागत से तैयार पोत हिंद महासागर में करेगा बहु-धातु खनिजों और समुद्री पर्यावरण का अध्ययन
कोलकाता, 9 सितंबर, वाय के न्यूज।
भारत ने गहरे समुद्र में खनिजों की खोज और महासागरीय अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। करीब 840 करोड़ रुपये की लागत से तैयार भारत के पहले उन्नत महासागरीय अनुसंधान पोत ‘ओआरवी सागर मंथन’ को बुधवार को कोलकाता स्थित ऋषि बंकिम शिपयार्ड में लॉन्च किया गया।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागरीय अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के लिए तैयार इस पोत को रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने डिजाइन और निर्मित किया है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने वर्चुअल माध्यम से इसका शुभारंभ किया।
हिंद महासागर में खनिजों की तलाश
‘सागर मंथन’ को डीप ओशन मिशन के तहत हिंद महासागर के मध्य-महासागरीय कटक क्षेत्र में बहु-विषयक अनुसंधान के लिए तैयार किया गया है। पोत के जरिए बहु-धातु हाइड्रोथर्मल सल्फाइड खनिजकरण की पहचान और समुद्री पर्यावरण की आधाररेखा तैयार करने का काम किया जाएगा।
पोत में मल्टीबीम बाथिमेट्री, मल्टीचैनल भूकंपीय प्रणाली, सब-बॉटम प्रोफाइलिंग, मौसम रडार और डायनेमिक पोजिशनिंग जैसी आधुनिक प्रणालियां हैं। इसके जरिए समुद्र की गहराई का सर्वेक्षण, भूभौतिकीय अध्ययन, वायुमंडलीय अवलोकन और समुद्री जल के नमूने जुटाए जा सकेंगे। आरओवी और एयूवी जैसे पानी के भीतर संचालित होने वाले उपकरणों को भी समुद्र में तैनात किया जा सकेगा।
43 साल पुराने ‘सागर कन्या’ की लेगा जगह
‘सागर मंथन’ धीरे-धीरे करीब 43 साल पुराने ओआरवी सागर कन्या की जगह लेगा। सागर कन्या को भारत ने 1983 में जर्मनी से खरीदा था।
नए पोत को दक्षिणी महासागर सहित कठिन समुद्री परिस्थितियों में संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी अनुमानित सेवा अवधि 30 वर्ष है और इसे इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग तथा अमेरिकन ब्यूरो ऑफ शिपिंग के दोहरे वर्गीकरण मानकों के अनुरूप बनाया गया है।
2028 में होगा कमीशन
सागर मंथन के निर्माण का अनुबंध जुलाई 2024 में हुआ था। 29 नवंबर 2024 को पहली स्टील कटिंग और 8 अप्रैल 2026 को इसकी कील बिछाई गई। लॉन्च के बाद अब इसके सुपरस्ट्रक्चर निर्माण, सिस्टम इंटीग्रेशन और समुद्री परीक्षण का चरण पूरा किया जाएगा। एनसीपीओआर को इसकी अंतिम डिलीवरी और कमीशनिंग 2028 में निर्धारित है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस तरह के पोतों से मिलने वाले वैज्ञानिक आंकड़े समुद्री आपदा पूर्व चेतावनी, जलवायु अध्ययन, पर्यावरण संरक्षण और महासागरीय अनुसंधान में भारत की क्षमता को मजबूत करेंगे।
