खेतों तक खाद पहुंचाने का अब डिजिटल मैनेजमेंट, खरीद से सप्लाई तक होगी निगरानी

यह समाचार साझा करें

WhatsApp Facebook X

पढ़ने की सुविधा

अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर और कंट्रास्ट चुनें।

अक्षर आकार

नई दिल्ली। खाद की उपलब्धता और उसकी आपूर्ति को लेकर किसानों की परेशानी कम करने के लिए केंद्र सरकार उर्वरक प्रबंधन को डिजिटल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब खाद के उत्पादन और आयात से लेकर उसके परिवहन, स्टॉक, खुदरा बिक्री और किसान तक पहुंचने की प्रक्रिया की निगरानी एकीकृत डिजिटल सिस्टम के जरिए की जा रही है।

उर्वरक विभाग के इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) में 14 करोड़ से अधिक आधार-लिंक्ड उर्वरक खरीदार और 2.5 लाख से अधिक खुदरा विक्रेता जुड़े हैं। सिस्टम के जरिए सालाना करीब 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री के लेन-देन और लगभग ₹2 लाख करोड़ की उर्वरक सब्सिडी के प्रबंधन को डिजिटल निगरानी में लाया गया है।

किसान को समय पर खाद मिले, इस पर फोकस

डिजिटल व्यवस्था का एक बड़ा उद्देश्य यह पता लगाना है कि खाद की उपलब्धता कहां है और उसकी आपूर्ति किस दिशा में जा रही है। इसके लिए उत्पादन, आयात, डिस्पैच, परिवहन, स्टॉक और खुदरा बिक्री से जुड़े आंकड़ों को एक साथ देखा जा रहा है।

सरकार ने इसके लिए अलग-अलग स्तरों पर डैशबोर्ड और एनालिटिकल टूल विकसित किए हैं। इनके जरिए राष्ट्रीय स्तर से लेकर राज्य, जिला और खुदरा विक्रेता स्तर तक खाद की स्थिति की निगरानी की जा सकती है। इससे किसी इलाके में आपूर्ति में असामान्य बदलाव या संभावित कमी का शुरुआती स्तर पर पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

वाहन की लोकेशन से पता चलेगा खाद कहां पहुंची

खाद की खेप के परिवहन को ट्रैक करने के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) को भी व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। डिस्पैच की जानकारी को वाहन की लोकेशन से जोड़कर यह देखा जा सकेगा कि खाद किस रास्ते से और कितनी देर में गंतव्य तक पहुंच रही है।

इससे परिवहन में देरी और असामान्य आवाजाही की पहचान करने में मदद मिलेगी। यानी सिर्फ यह दर्ज नहीं होगा कि किसी जगह के लिए खाद भेजी गई, बल्कि उसकी आगे की आवाजाही और गंतव्य पर उपलब्धता की भी निगरानी की जा सकेगी।

किसान की जरूरत और खाद की खरीद का होगा मिलान

सरकार उर्वरक की बिक्री को किसान की जमीन और फसल से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके लिए iFMS को राज्यों के किसान, भूमि और फसल संबंधी डेटाबेस तथा एग्रीस्टैक से जोड़ने का काम किया गया है।

उर्वरक बिक्री के लिए विकसित किए जा रहे फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइज़र सेल्स (FFS) के तहत किसान अपनी एग्रीस्टैक आईडी के आधार पर खाद की बुकिंग कर सकेगा। भूमि और स्वामित्व संबंधी जानकारी के सत्यापन के बाद QR आधारित बुकिंग तैयार होगी और इसकी जानकारी खुदरा विक्रेता के PoS डिवाइस पर उपलब्ध होगी।

इस व्यवस्था से बुकिंग के समय बताई गई जरूरत और किसान द्वारा वास्तव में खरीदी गई खाद की मात्रा का मिलान किया जा सकेगा। प्रति हेक्टेयर खाद की खपत और अलग-अलग फसलों में उर्वरक के इस्तेमाल का भी विश्लेषण किया जा सकेगा।

सब्सिडी में भी डिजिटल जांच

खाद पर मिलने वाली सब्सिडी के भुगतान को भी वास्तविक बिक्री से जोड़ा गया है। 1 जनवरी 2026 से सब्सिडी बिलों के इलेक्ट्रॉनिक प्रसंस्करण और PFMS/e-Bill जैसी वित्तीय प्रणालियों के साथ एकीकरण की दिशा में काम आगे बढ़ाया गया है।

DBT से जुड़े बिलों और लेन-देन की जांच के लिए रैंडम वेरिफिकेशन और अतिरिक्त डेटा आधारित जांच की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य सब्सिडी के भुगतान में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाना है।

डिजिटल सिस्टम से बदलेगा खाद प्रबंधन का तरीका

iFMS में किए जा रहे बदलावों का दायरा केवल खाद की बिक्री दर्ज करने तक सीमित नहीं है। अब उपलब्ध आंकड़ों के जरिए यह समझने की कोशिश की जा रही है कि किस इलाके में कितनी खाद की जरूरत है, वहां कितना स्टॉक है, खाद किस रास्ते से पहुंच रही है और किसानों द्वारा उसकी वास्तविक खपत कितनी है।

इससे खाद की मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस डिजिटल व्यवस्था का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा जब समय पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जरूरत वाले इलाकों में खाद की आपूर्ति सुनिश्चित हो और किसान को खाद के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।

पाठकों की पसंद

सबसे अधिक पढ़े गए

पिछले 7 दिनों के आधार पर