एनआरडीसी-एनसीआईएसएम के बीच समझौता
नई दिल्ली, 24 जुलाई। आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में नए शोध, नवाचार और उपयोगी तकनीकों के विकास को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी) और राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते का उद्देश्य भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े शोध और नई तकनीकों को प्रयोगशाला से आम लोगों तक पहुंचाना है। इसके तहत शोधकर्ताओं और चिकित्सकों को पेटेंट, ट्रेडमार्क, तकनीक के विकास, उद्योगों से जुड़ने और शोध को व्यावसायिक रूप देने में मदद दी जाएगी।
एनआरडीसी बौद्धिक संपदा संरक्षण, पेटेंट और ट्रेडमार्क पंजीकरण, प्रौद्योगिकी मूल्यांकन, लाइसेंसिंग और तकनीक के व्यावसायीकरण में सहयोग करेगा। साथ ही नवाचार करने वाले शोधकर्ताओं को मेंटरिंग और इनक्यूबेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
दूसरी ओर, एनसीआईएसएम अपने अधीन आने वाले संस्थानों, शोध केंद्रों और पंजीकृत चिकित्सकों को इस पहल से जोड़ेगा। इसके तहत नवाचार, उद्यमिता, क्षमता निर्माण, आइडियाथॉन, हैकाथॉन, उद्योग जगत से संवाद और बौद्धिक संपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
एमओयू का आदान-प्रदान एनआरडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर अमित रस्तोगी (सेवानिवृत्त) और एनसीआईएसएम की अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोठेकर ने किया।
कमोडोर अमित रस्तोगी ने कहा कि यह साझेदारी भारतीय चिकित्सा प्रणाली में काम कर रहे शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं को अपने शोध को उपयोगी उत्पादों और तकनीकों में बदलने में मदद करेगी। वहीं डॉ. मनीषा कोठेकर ने कहा कि यह समझौता पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
