आयुर्वेद के लिए वैश्विक गुणवत्ता मानक बनाने की दिशा में कदम, सीसीआरएएस और बीआईएस में समझौता

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नई दिल्ली, 8 अगस्त 2026। आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने आयुष क्षेत्र में गुणवत्ता मानकों, अनुरूपता मूल्यांकन, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य आयुर्वेद के लिए ऐसे मानक विकसित करना है, जिन्हें वैश्विक स्तर पर अपनाया और स्वीकार किया जा सके।

समझौते के तहत आयुर्वेदिक उत्पादों और पद्धतियों की गुणवत्ता तथा सुरक्षा से जुड़े वैज्ञानिक मानकों को मजबूत करने पर काम किया जाएगा। इसके साथ ही अनुसंधान और मानकीकरण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास होगा।

इस पहल से सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित आयुर्वेदिक उत्पादों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आयुर्वेदिक उत्पादों की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि सीसीआरएएस और बीआईएस की यह साझेदारी विज्ञान आधारित मानक तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे आयुर्वेद के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत होगा और क्षेत्र में नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।

समझौते का एक प्रमुख उद्देश्य आयुर्वेद से जुड़े उत्पादों, प्रक्रियाओं और अनुसंधान के लिए गुणवत्तापूर्ण एवं वैज्ञानिक मानकों को विकसित करना है, ताकि आयुर्वेद को आधुनिक गुणवत्ता और अनुरूपता मूल्यांकन की कसौटी पर और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

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